सुबह जब उठा तो बाहर हल्की-हल्की वर्षा हो रही थी।

रेवती के सिर में दर्द वैसा ही था। चेहरा उतरा उतरा सा लग रहा था। तय हुआ कि स्कूल से लौटने के पश्चात ’क्लिनिक’ जाएंगे।

वर्षा तेज हो चुकी थी और विद्यालय में विद्यर्थियों के लिये कमरों का अभाव था। दूसरा पीरियड ’ज्योग्राफी लैब’ में लिया। यहां भी जगह तंग थी छत टपकने के कारण पानी कमरे में चला आया था। इस पीरियड में विद्यर्थियों को खड़े-खड़े ही पढ़ना पड़ा।

तीसरे पीरियड में सपना और निशा पुनः विक्स की गोलियां बैग पर रखते हुए बोली – “सर, आपकी खांसी अभी ठीक नहीं हुई …..।”

“आज तुम फिर विक्स लेकर आई हो? अभी तो पिछ्ले कल की दी हुई तुम्हारी गोलियां मेरे बैग में ज्यों की त्यों पड़ी हैं” मैंने प्रश्न सूचक भाव से उन्हें देखते हुए पूछा।

“सर! आपने उन गोलियों को अभी तक नहीं खाया? खाकर तो देखिए…।” मैंने उन्हें अधिक बोलने का अवसर नहीं दिया। गोलियां चुपचाप रख लीं।

पांचवां पीरियड +१ में था।

पीरियड समाप्त होने पर नंद लाल मुझसे आकर बोला – “सर! आप किस धर्म को मान्ते हैं?” उसका प्रश्न सीधा-सादा था परन्तु महत्वपूर्ण था। मैं उसकी ओर देखकर मुसकुरा भर दिया।

“आप बहुत धार्मिक ख़्यालों के हैं, सर!” मैं चुपचाप कुछ सोचता रहा।

“बताइए न सर..। मुझे खामोश देख नद लाल ने पुनः पूछा।

“मैं तो उसी धर्म को मानता हूं जो आदमी को आद्मी से जोड़ता है। मनुष्य की सोच को संकीर्णता में नहीं जकड़ता अपितु उसे विस्तार देता है।” नंद लाल उत्तर पाकर एक ओर चला गया कुछ सोचता हुआ। नहीं मालूम कि वह मेरि बात को समझ पाया या नहीं।

शाम को रेवती को लेकर क्लिनिक पहूंचा। क्लिनिद बन्द था। कुछ खरीद्दारी के उपरांत घर पहुंचे। रेवती ने बताया

 

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